फिल्म ‘ ये है इण्डिया ‘ के ट्रेलर से गहराया विवाद

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दोपहर संवाददाता
मुंबई। क्या सिनेमा में कुछ भी कहने की पूर्णत आजादी होती चाहिए।निर्देशक लोम हर्ष का ऐसा ही मानना है ” लेकिन क्या एक फ़िल्म के माध्यम से देश के एक और बटवारे की बात करना सही है। दरअसल इन दिनों फ़िल्म ये है इंडिया के एक संवाद को लेकर विवाद शुरू हो गया है। फिल्म ये है इंडिया के निर्देशक लोम हर्ष निर्माता संदीप चौधरी और मुख्य अभिनेता गेवी चहल ने मिडिया से इस विवाद के विषय में प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया।
फ़िल्म ये है इंडिया के ट्रेलर में एक संवाद से देश के साथ ही पाकिस्तान में भी लोग आपत्ति दर्ज कर रहे है फिल्म के इस संवाद से देश की अखंडता पर अघात के साथ ही पड़ोसी देश की नकारात्मक छवि बतायी जा रही है। देश की आजादी की समय बटवारे का विरोध भी बहुत हुआ था कई सामाजिक संस्थाएं और समाज़ के विभिन्न क्षेत्र कला, सहित सामाजिक कार्यकर्त्ता और राजनेता आज भी बंटवारे को एक त्रासदी मानते है. फिल्म के ट्रेलर इस शुरू के हिस्से में भारत देश के रूढ़िवादी विचारों का देश विशाल जनसंख्या, प्रदूषण और गरीबी के लिए पूरी दुनियाँ में छवि की बात करता है तो साथ ही देश की प्राचीन समृद्ध परंपरा और मूल्योँ की बात करता है लेकिन ट्रेलर के अंत में यह संवाद की कानून और व्यवस्था सबके लिए एक समान है ही नहीं तो बना दीजिये एक नया पाकिस्तान और निकाल फेंकिए लाचार और बेबस लोगो को ।
ट्रेलर के इसी हिस्से का विरोध हो रहा है क्या निर्देशक इस संवाद के जरिये देश के एक बँटवारे की मांग उठा रहे है साथ ही पाकिस्तान की नकारात्मक छवि को प्रस्तुत करता है कि क्या पाकिस्तान एक लाचार और बेबस लोगो का देश है। देश के साथ ही पाकिस्तान की कई सोशल एक्टिविस्ट और मिडिया के लोगो ने इस ट्रेलर पर सोशल मिडिया के प्लेटफॉर्म के जरिये अपना विरोध जाहिर कर रहे है तो इण्डिया में भी कई यूजर्स इसे फ़िल्मो के आजादी के नाम पर देश को बांटने का समर्थन करने का प्रयास मानते है.

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