फैनी की आहट से घबराहट

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20 साल में ओडिशा से टकराने वाला सबसे खतरनाक तूफान होगा फैनी, 24 घंटे तक सभी उड़ानें रद्द
ओडिशा के तट से कल टकरा सकता है फैनी; नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल हाईअलर्ट पर
ओडिशा में 880 राहत शिविर बनाए गए, अनहोनी से बचने के लिए सभी शिक्षण संस्थान बंद
अतिसंवेदनशील क्षेत्रों से साढ़े तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया

दोपहर संवाददाता
भुवनेश्वर। ज्वाइंट टाईफून वॉर्निंग सेंटर (जेडब्ल्यूटीसी) के मुताबिक फैनी तूफान बीते 20 सालों में अब तक का सबसे खतरनाक चक्रवात साबित हो सकता है। ओडिशा में 1999 में आए सुपर साइक्लोन से करीब 10 हजार लोग मारे गए थे। भारतीय मौसम विभाग सूत्रों के मुताबिक पिछले 43 सालों में यह पहली बार है जब अप्रैल में भारत के आसपास मौजूद समुद्री क्षेत्र में ऐसा कोई चक्रवाती तूफान उठा है।
सूत्र के मुताबिक ओडिशा की ओर फैनी 16 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। यह शुक्रवार सुबह 8-10 बजे के बीच देवस्थान पुरी के पास स्थित गोपालपुर तक पहुंच जाएगा। पहले इसके पहुंचने का समय दोपहर 3 बजे माना जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक 13 अतिसंवेदनशील जिलों के करीब साढ़े 11 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाए जाने के प्रयास जारी हैं। अब तक साढ़े तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा चुका है।
चक्रवात दोपहर के आसपास पुरी पहुंचेगा। इसके बाद पश्चिम बंगाल का रुख करेगा। इसका असर आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु के उत्तर-पूर्व इलाकों में भी दिखेगा। चक्रवात से ओडिशा के 14 जिले प्रभावित होंगे। इसमें पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपारा, बालासोर, भदरक, गंजम, खुर्दा, जाजपुर, नयागढ़, कटक, गाजापटी, मयूरभंज, ढेंकानाल और कियोंझार शामिल हैं।

पीएम मोदी की हाईलेवल मीटिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चक्रवात फोनी की स्थिति को लेकर बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री को चक्रवात के संभावित मार्ग की जानकारी दी गयी। साथ ही फोनी को लेकर एहतियात के तौर पर और स्थिति से निटपने की तैयारी के तौर पर उठाये गये कदमों की जानकारी दी गयी। इनमें पर्याप्त साधनों की व्यवस्था, एनडीआरएफ और सशस्त्र बलों की टीमों की तैनाती,पेयजल की आपूर्ति का इंतजाम, बिजली और दूरसंचार सेवाओं के अस्तव्यस्त हो जाने पर उन्हें बहाल करने के लिए की गयी तैयारी आदि शामिल हैं। उभरती स्थिति की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित राज्यों के अधिकारियों के साथ तालमेल बनाये रखने का निर्देश दिया ताकि एहतियाती कदम तथा जरूरत के हिसाब से राहत एवं बचाव के लिए प्रभावी कदम उठाये जा सकें।

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