‘साजिश’ की जांच करेंगे पटनायक

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सीजेआई रंजन गगोई पर यौन उत्पीड़न का मामला
बंद लिफाफे में अदालत को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट

दोपहर संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के खिलाफ ‘साजिश’ के मामले में जांच के आदेश दिए हैं. अदालत ने स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम का गठन किया है, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके पटनायक करेंगे.
इसके साथ ही इस मामले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) चीफ उनकी मदद करेंगे.सुप्रीम कोर्ट ने वकील बैंस के हलफ़नामे और दी गई सामग्री सील बंद लिफ़ाफ़े में जांच के लिए पूर्व जस्टिस पटनायक को भेजने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने जांच का यह आदेश वकील उत्सव बैंस की ओर से किए गए दावों के बाद दिया है.
उत्सव ने हलफनामा दायर कर कहा है कि कॉरपोरेट जगत के व्यक्ति और कुछ फिक्सर चीफ जस्टिस को झूठे आरोपो में फंसाने की साज़िश रच रहे हैं.
हलफनामे में बैंस ने दावा किया कि गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का इल्ज़ाम लगाने वाली पूर्व महिला कर्मचारी का प्रतिनिधित्व करने और सीजेआई के खिलाफ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेस के लिए डेढ़ करोड़ रुपये देने की पेशकश की गयी थी. इसके बाद मंगलवार को अदालत ने बैंस को नोटिस जारी कर अपने दावे के समर्थन में सीलबंद लिफाफे में सामग्री पेश करने का निर्देश दिया था.

कौन हैं एके पटनायक?

69 वर्षीय अनंग कुमार पटनायक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं। पटनायक 2009 से लेकर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। सीबीआई डायरेक्टर रहे आलोक वर्मा मामले में एके पटनायक को हाल ही में जांच प्रमुख नियुक्त किया गया था। पटनायक को 2012 में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में आने वाले मामलों की सुनवाई करने के लिए बनाई गई दो जजों की बेंच में शामिल किया गया था। पटनायक उस ‘इन-हाउस कमेटी’ के सदस्य थे, जिसने कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन पर लगे फंड के गलत उपयोग के आरोपों की जांच की थी। इस जांच के बाद भारत में ऐसा पहली बार किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाया गया था। जस्टिस एके ने कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाए थे। 2016 में उन्होंने कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम के कारण जजों की गुणवत्ता खतरे में आ जाती है।17 नवंबर, 2009 से 2 जून, 2014 तक सुप्रीम कोर्ट के जज बने रहने के बाद एके पटनायक के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की ओर से सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन पद के लिए नॉमिनेट किया गया था।

जस्टिस रमन्ना ने नाम वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति से जस्टिस एनवी रमन्ना ने किनारा कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस इस मामले में विभागीय जांच के आदेश देते हुए तीन सिटिंग जज- जस्टिस एसए बोबड़े, एनवी रमन्ना और इंदिरा बनर्जी की समिति का गठन किया था.

क्या है वजह?
शिकायत करने वाली महिला ने इस समिति में रमन्ना के होने पर सवाल खड़े किए थे. महिला का आरोप है कि रमन्ना और सीजेआई गोगोई ख़ास दोस्त हैं ऐसे में वो जांच को प्रभावित कर सकते हैं. महिला के मुताबिक दोनों जजों के पारिवारिक संबंध हैं ऐसे में निष्पक्ष जांच सवालों के घेरे में आ जाती है. महिला का आरोप है कि 20 अप्रैल को अज उन्होंने एफिडेविट दाखिल किया था तब भी जस्टिस रमन्ना ने आरोपों को खारिज कर दिया था.

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