अनमोल है विरासत

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बाल मुकुन्द ओझा
18 अप्रैल को मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस । इसे वर्ल्ड हैरीटेज डे भी कहा जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य सांस्कृति धरोहरों को संरक्षित, सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। दुनिया भर में 1,052 हैरीटेज साइट्स हैं जिनमें से 36 भारत में हैं। बीता हुआ कल काफी महत्त्वपूर्ण होता है।
बीता हुआ समय वापस नहीं आता, किंतु अतीत के पन्नों को हमारी विरासत के तौर पर कहीं पुस्तकों तो कहीं इमारतों के रूप में संजो कर रखा गया है। हमारे पूर्वजों ने निशानी के तौर पर तमाम तरह के मंदिर मकबरे, मस्जिदें, किले, कुँए, बावड़ी और अन्य चीजों का सहारा लिया, जिनसे हम उन्हें आने वाले समय में याद रख सकें। लेकिन वक्त की मार के आगे कई बार उनकी यादों को बहुत नुकसान पहुँचा। किताबों, इमारतों और अन्य किसी रूप में सहेज कर रखी गई यादों को पहले स्वयं हमने भी नजरअंदाज किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि हमारी अनमोल विरासत हमसे दूर होती गईं और उनका अस्तित्व भी संकट में पड़ गया।
यूनेस्को ने विरासत को अनमोल मानते हुए लोगों से इन्हें सुरक्षित और सम्भाल कर रखने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था। किसी भी राष्ट्र का इतिहास, उसके वर्तमान और भविष्य की नींव होता है। जिस देश का इतिहास जितना गौरवमयी होगा, वैश्विक स्तर पर उसका स्थान उतना ही ऊँचााना जाएगा। भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक धरोहर और भ्रमण स्थल हैं जो हमारी संस्कृति और परंपरा के प्रतीक है। भारतीय विरासत के महत्वपूर्ण स्मारकों और कलाकृतियों में से दिल्ली दरवाजा, अस्तोदीया गेट, दिल्ली का लाल किला, मानेक बुर्ज, सरदार पटेल की विरासत भवन, तीन दरवाजा, भादरा-गेट, सिद्दी सैय्यद, सारनाथ, काशी, वाराणसी के मन्दिर आदि हैं। भारत की ये विरासत और स्मारक प्राचीन सम्पति हैं। संस्कृति और परंपरा की इस विरासत को आने वाली पीढ़ीयों को देने के लिये हमें सुरक्षित और संरक्षित करना चाहिये। भारत के ऐतिहासिक महत्व के कुल 36 स्थल, विश्व विरासत स्थल सूची में दर्ज हैं। इनमें 26 सांस्कृतिक, 8 प्राकृतिक श्रेणी में शामिल हैं। विश्व धरोहरों के मामले में भारत का दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान है । हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व धरोहर दिवस विश्व की अद्भुत, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व को दर्शाता रहा है।
भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का जिक्र करें तो ऐसे बहुत से स्थानों का नाम महत्वपूर्ण है। लेकिन ताजमहल और मुगलकालीन शिल्प की दास्तां बयान करने वाले दिल्ली के लालकिले ने इस सूची को भारत की ओर से और भी खूबसूरत बना दिया है। ताजमहल को पिछले वर्ष कराए गए एक विश्वव्यापी मतसंग्रह के दौरान दुनिया के सात अजूबों में अव्वल नंबर कर रखा गया था। विश्व धरोहर सूची में शामिल भारत की अजंता की गुफाएं 200 साल पूर्व की कहानी कहती नजर आती हैं लेकिन इतिहास के पन्नों में धीरे-धीरे ये भुला दी गईं और बाद में बाघों का शिकार करने वाली एक ब्रिटिश टीम ने इनकी फिर खोज की।
विश्व धरोहर सूची में शामिल एलोरा की गुफाएं दुनिया भर को भारत की हिन्दू, बौध्द और जैन संस्कृति की कहानी बताती हैं। ये गुफाएं लोगों को 600 और 1000 ईस्वीं के बीच के इतिहास से रूबरू कराती हैं। भारत को विश्व धरोहर सूची में 14 नवंबर 1977 में स्थान मिला। तब से अब तक 32 भारतीय स्थलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा फूलों की घाटी को नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के एक भाग रूप में इस सूची में शामिल कर लिया गया है।
विश्व विरासत स्थल समिति’ का उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है। इस समिति द्वारा ऐसे स्थलों को कुछ खास परिस्थितियों में आर्थिक सहायता भी दी जाती है। प्रत्येक विरासत स्थल उस देश विशेष की संपत्ति होती है, जिस देश में वह स्थल स्थित हो। आने वाली पीढ़ियों के लिए और मानवता के हित के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का हित भी इसी में होता है कि वे इनका संरक्षण करें। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी पूरे विश्व समुदाय की होती है। 

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