कांग्रेस-एनसीपी को मनसे का सहारा

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मुंबई में प्रचार अभियान ने तेजी पकड़ी
तल्खियों के बावजूद भाजपा शिवसेना एक साथ
दोपहर संवाददाता
मुंबई। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुंबई में प्रचार अभियान ने तेजी पकड़ ली है, जहां कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। शिवसेना और भाजपा के तल्ख रिश्तों के बावजूद चुनाव से ठीक पहले एकसाथ आ जाने से कांग्रेस की मुश्किलें जहां एक ओर बढ़ गईं हैं तो वहीं दूसरी ओर मनसे के प्रमुख राज ठाकरे का कांग्रेस को समर्थन से पार्टी को राहत मिली है।
मुंबई में छह लोकसभा सीटों में से कांग्रेस पांच पर और उसका सहयोगी दल राकांपा एक सीट पर मैदान में हैं। इस बार कांग्रेस और भाजपा वर्धा, नागपुर, गढ़चिरौली-चिमूर, चंद्रपुर सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं जबकि रामटेक और यवतमाल-वाशिम में कांग्रेस का मुकाबला शिवसेना से होगा। भंडारा-गोंदिया में राकांपा का मुकाबला भाजपा से होगा।
नागपुर, चंद्रपुर और यवतमाल-वाशिम निर्वाचन क्षेत्रों से क्रमश: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, हंसराज अहीर और वरिष्ठ कांग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे चुनाव लड़ते रहे हैं। साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस दो से तीन लाख मतों के अंतर से छह सीटों पर हार गई थी। राकांपा के प्रफुल पटेल को करीब 1.4 लाख मतों के अंतर से भंडारा-गोंदिया सीट पर हार का सामना करना पड़ा था।
भाजपा के टिकट पर जीतने वाले और प्रफुल पटेल को हराने वाले नाना पटोले साल 2017 में कांग्रेस में शामिल हुए। इस सीट पर 2018 में हुए उपचुनाव में राकांपा के मधुकर कुकड़े ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने गढ़चिरौली-चिमूर से नामदेव उसेंडी को फिर से उम्मीदवार बनाया है। उसेंडी 2014 में विधायक थे जब वे गढ़चिरौली में कांग्रेस की तरफ से खड़े हुए लेकिन उन्हें पूर्व भाजपा विधायक अशोक नेटे ने हरा दिया।चंद्रपुर में मौजूदा शिवसेना विधायक सुरेश धनोरकर केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर के खिलाफ पार्टी के उम्मीदवार हैं।

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