अब कांग्रेस के 35 बागी नगरसेवकों की नौटंकी

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प्रदेश अध्यक्ष के बजाय शहर अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपने का किया नाटक
कांग्रेस के इस नाटक को आपसी सांठ गांठ मान रहे लोग
जितेंद्र तिवारी/दोपहर
भिवंडी। भिवंडी लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेसी उमीदवार को बदलने के लिए हाई कमान के आदेश के खिलाफ बगावत करने वाले 34 नगरसेवक अब नौटंकी करने में जुट गए है।उक्त नगरसेवकों ने नाटकीय तरीके से जनता की नजर में अपनी इज्जत बचाने के लिए नाटकीय तरीके से सांठ गांठ कर शहर अध्यक्ष को इस्तीफा दिया।लेकिन अध्यक्ष ने इस्तीफा नही स्वीकार करने का ढ़िढोरा पिट रहे है। जिसके बाद यह सवाल पैदा होने लगा है कि क्या शहर अध्यक्ष कॉंग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से बड़ा हो गया है।कांग्रेस अध्यक्ष के इस कृत्य की जनता में जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है।
मालूम हो कि भिवंडी में कांग्रेस हाईकमान द्वारा पूर्व सांसद सुरेश टावरे को उमीदवार घोषित किया गया। जिसके विरोध में कांग्रेस के 35 नगरसेवको ने पार्टी आदेश का उलंघन करते हुए हाई कमान के आदेश को जूतों तले रौंदते हुए बागी तेवर अख्तियार कर विरोध में उतर गए।हालांकि उनके विरोध का हाईकमान के निर्णय पर कोई असर नही हुआ और कांग्रेस ने अपना उमीदवार नही बदला।
अब जब 35 कांग्रेसियों की पहुच हाईकमान तक सड़ी रस्सी साबित हुआ और उनके मांग को तवज्जो नही मिला तब सभी बागी नगरसेवक नौटंकी करने में जुट गए है। सूत्र बताते है कि कथित तौर पर कांग्रेस के सभी 35 नगरसेवकों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बजाय अपना इस्तीफा भिवंडी शहर जिला अध्यक्ष को सौप दिए है। जिसकी कोई भी प्रति अभी तक सार्वजनिक नही हुई है।जबकि राजनीति के जानकारों का मानना है कि कोई भी नगरसेवक अपना इस्तीफा सिर्फ हाई कमान को सौप सकता है।लेकिन नगरसेवक अपनी खत्म होती राजनीति को बचाने के लिए यह नौटंकी कर रहे है और उनके इस नौटंकी ने शहर अध्यक्ष बराबर का हिस्सेदार भी है।सूत्र तो यहाँ तक कह रहे है कि यदि भिवंडी अध्यक्ष ने इनका इस्तीफा लिया भी तो उसे हाईकमान को भेजना चाहिए।साथ ही अध्यक्ष को पार्टी विरोधी कार्य के कारण नगरसेवकों को नोटिस देना चाहिए था। लेकिन अध्यक्ष ने ऐसा न कर पार्टी विरोधी काम करने वालो का समर्थन किया।
जो शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।इस संदर्भ में जब एआईसीसी के महासचिव पी संदीप व हुसैन दलवाई से पूछा गया तो वे चुप्पी साध गए।जिससे यह साफ हो रहा है कि हाई कमान के आदेश का उलंघन सभी कांग्रेसियों के आपसी सांठ गांठ से हो रहा था।इतना ही नही बागियों से इस्तीफा इसलिए भी नही लिया जा रहा है कि कांग्रेस को मनपा में महापौर की कुर्सी का मोह है।

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