उच्च स्तर पर होती है बड़े बैंकों की निगरानी : आरबीआई

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आईडीबीआई अब प्राइवेट बैंक की श्रेणी में
जोखिम भारांश संपत्तियों का 0.6 प्रतिशत तय
इस बैंक में एलआईसी की नियंत्रक हिस्सेदारी है
दोपहर संवाददाता
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंकने कहा है कि, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक को एक अप्रैल तक अतिरिक्त पूंजी आवश्यकता नियमन का अनुपालन करना होगा। केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को कहा कि, ये बैंक बड़े बैंक हैं। इन्हें डी-एसआईबी या घरेलू प्रणाली की दृष्टि से महत्वपूर्ण बैंक माना गया है।
एसआईबी के तहत आने वाले बैंकों की निगरानी उच्चस्तर पर की जाती है। इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इनमें किसी तरह की कोई गड़बड़ी होने पर वित्तीय सेवाओं में संभावित अफरातफरी को रोका जा सके।
रिजर्व बैंक ने कहा, डी-एसआईबी के लिए अतिरिक्त सामान्य इक्विटी टियर 1, सीईटी-1 की अनिवार्यता को एक अप्रैल 2016 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और एक अप्रैल 2019 से यह पूर्ण रूप से लागू हो जायेगी। भारतीय स्टेट बैंक के संदर्भ में अतिरिक्त सीईटी-एक मूल पूंजी अनिवार्यता एक अप्रैल से लागू हो रही है और यह जोखिम भारांश संपत्तियों का 0.6 प्रतिशत तय की गई है। अन्य दो बैंकों के संदर्भ में यह 0.4 प्रतिशत है। रिजर्व बैंक ने डी-एसआईबी यानी घरेलू प्रणाली के लिये महत्वपूर्ण बैंक के साथ कामकाज को लेकर रिजर्व बैंक ने 22 जुलाई 2014 को रूपरेखा जारी की थी। इस रूपरेखा में रिजर्व बैंक के लिये जरूरी है कि वह जिन बैंकों को डी-एसआईबी बैंक के तौर पर नामित किया गया है उनके नाम घोषित करे।सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में सरकारी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी अधिग्रहण किये जाने के मद्देनजर इसको अब प्राइवेट श्रेणी के बैंक की सूची में डाल दिया गया है। बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने नियामकीय उद्देश्य से आईडीबीआई बैंक लिमिटेड को प्राइवेट सेक्टर बैंक की श्रेणी में डाल दिया है जो गत 21 जनवरी से प्रभावी हो गया है। उल्लेखनीय है कि आर्थिक तौर पर कमजोर हो चुके इस बैंक में 51 फीसदी एलआईसी ने अधिग्रहण किया है। अब इस बैंक में एलआईसी की नियंत्रक हिस्सेदारी है।

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