अगले जनम मोहे बेटी ही कीजो

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बेटियों ने दिया बाप के अर्थी को दिया कन्धा और मुखाग्नि
दोपहर संवाददाता
नालासोपारा। हिंदू परंपरा के अनुसार बेटा ही पिता को कंधा देता है और बेटे ही परिवार के सदस्यों को मुखाग्नि दे सकते हैं, लेकिन समाज बदल रहा है और इसके साथ इसकी परंपराएं भी बदल रही हैं।
भारतीय समाज में मान्यता है कि मां-पिता का निधन हो या फिर परिवार में किसी का भी निधन होता है तो परिवार का बेटा ही कंधा और मुखाग्नि देता है,लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समाज की सोच में तेजी से बदलाव आया है कहीं बेटियों को बराबरी का हक मिला है वहीं उनको लेकर धारणाएं भी बदली हैं। ऐसा ही एक मामला नालासोपारा (पूर्व) शहर में बेटियां द्वारा अपने पिता को कंधा और मुखाग्नि देने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नालासोपारा शहर महामंत्री मनोज बारोट ने जानकारी दी कि गुरुवार उनके पुराने मित्र एवम भाजपा पदाधिकारी जयंतीलाल कोठारी के ससुर का देहांत हो गया तो यह खबर सुनकर उस दिवंगत आत्मा की अंतिम यात्रा मे गए तो वहाँ का दृश्य देखकर मन ही मन बहुत खुश हुए हो,क्योकि बेटियां अपने बाप को कंधा दी थी,दरअसल बात यह है कि राजस्थान के चार भुजा के मूल निवासी स्वर्गवासी ईश्वरलाल हीरालाल कावड़िया (जैन) का कल बुधवार को नालासोपारा के उनके निवास स्थान पर निधन हो गए। गुरुवार को उनकी अन्तिम यात्रा निकली,जिसमे उनकी अपनी बेटी संध्या जयंतीलाल कोठारी और बहने ममता,सीमा, संगीता,फैंसी और रेखाने बेटे का फर्ज निभाते हुए अपने पिताजी अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर कर समाज को एक बढ़िया उदाहरण दिया है,हालाँकि नई दिशा देने का काम किया और समाज को यह बता दिया कि बेटी और बेटे मे कोई फर्क नही होता है।

बेटियों ने आज बेटों से भी बढ़कर काम किया है गलत परम्पराओं को तोड़ते हुए उनका ये कदम बेहद सराहनीय है अपने पिता को मोक्ष तक ले जाने से बड़ा दूसरा कोई नेक रास्ता नहीं। उन्होंने कहा कि और उनके मुंह से एक शब्द निकला कि ऐसी बेटियां भगवान सबको दे। -मनोज बारोट (भाजपा नालासोपारा शहर महामंत्री)

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