ब्याज दर में कर सकता है कटौती!

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मौद्रिक समीक्षा बैठक में हो सकती है कटौती
इससे पहले कटौती कर आरबीआई ने दिए थे संकेत
आरबीआई ने पहले घटा चुका है 0.25 फीसदी
सीएसओ के डेटा के अनुसार नियंत्रण में है महंगाई
कटौती वक्त आरबीआई रखता महंगाई दर पर ध्यान
दोपहर संवाददाता
मुंबई। आरबीआई एक बार फिर रेपो रेट (ब्‍याज दों) में कटौती कर सकती है. दरअसल जनवरी के आईआईपी और फरवरी के महंगाई दर के आंकड़े भी कटौती पर निणर्य लेते वक्‍त ये तय करेंगे. वहीं, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर ने बैंकरों के साथ हुई पिछली बैठक में इसके संकेत दिए थे. साथ ही एक्‍सपर्ट का भी ये मानना है कि केंद्रीय बैंक अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती करने के संबंध में ये फैसला ले सकता है.बता दें कि 11 अप्रैल को शुरू होने जा रहे आमचुनाव से पहले 5 अप्रैल को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में होने वाली मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक तय है. इस बैठक में ब्याज दरों में कटौती को लेकर फैसला किया जाना है. बता दें कि इसके संकते दास ने पहले दिया था कि सबकुछ ठीक रहा था तो एक और कट मिल सकता है, जिससे आमलोगों को फायदा होगा.गौरतलब है कि इससे पहले हुई बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी, जिसके बाद मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक एक पोल में अर्थशास्त्रियों ने अगली बैठक में भी ब्याज दरों में कटौती करने का अनुमान लगाया था.फाइनेंशियल एक्‍सपर्ट अमित रंजन के मुताबिक और ओपिनियन पोल में अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना था कि लोकसभा चुनाव से पहले होने वाली आरबीआई की बैठक में ब्याज दरों में एक बार फिर से कटौती की जा सकती है. बता दें कि पिछली बैठक में अप्रत्याशित रूप से आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की घोषणा करते हुए इसे 6.50 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया था. साथ ही आरबीआई ने अपने मौद्रिक रुख को ‘सख्त’ से बदलकर ‘न्यूट्रल’ (सामान्य) कर दिया है. दरअसल में नीतिगत रुख में बदलाव किए जाने के बाद से ही ये माना जा रहा था कि आरबीआई आगे भी ब्याज दरों में कटौती करके आमजन को राहत दे सकता है.
इसके अलावा केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की ओर से जारी डेटा के अनुसार जनवरी में खुदरा महंगाई दर घटकर 2.05 फीसदी रही, जो कि दिसंबर में 2.11 फीसदी थी. वहीं, दिसंबर में आईआईपी ग्रोथ रेट 2.4 फीसदी रही, जो कि नवंबर में 0.3 फीसदी थी. इतना ही नहीं दिसंबर में आईआईपी में शानदार सुधार भी देखने को मिला था.
ब्याज दरों को तय करने वक्त आरबीआई खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है. अगर आज आने वाले दोनों ही आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहते हैं, तो चुनाव के पहले आरबीआई एक बार फिर से ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है, जिसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा.

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