पालघर में कुपोषण से तीन साल में 105 बच्चों की मौत

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दोपहर संवाददाता
मुंबई। मुंबई के करीब आदिवासी बहुल पालघर जिले में कुपोषण से बच्चों की मौत के मामले चिंताजनक बने हुए हैं। जिले भर में करीब आठ हजार से बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। आदिवासी बहुल मोखङा तहसील में ही तीन वर्षों में 105 बच्चों के कुपोषण से मौत की जानकारी सामने आई है। करीब 25 वर्षो से इस भाग में कुपोषण की समस्या व्याप्त है, जिससे लड़ने के लिए सरकार ने अब तक करोड़ो रुपये खर्च कर दिए है। बाल विकास केंद्र व आंगनबाड़ी केंद्र बना कर पोषक आहार तक दिए जा रहे है। लेकिन दावों के विपरीत जमीन पर इसका असर दिख रहा है। जिले के मोखाडा, तलासरी, जव्हार, वाडा, दहाणू आदि के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में पिछले कई सालों से कुपोषण की गंभीर समस्या बनी हुई है। पिछले वर्ष पालघर जिले के मोखाडा सहित अन्य आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण से हुए बच्चों की एकाएक मौत के बाद ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए आदिवासी क्षेत्रों में राजनेताओं का तांता लगना शुरू हो गया था। राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने क्षेत्र का दौरा किया था और कुपोषण को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिलाया था। उल्लेखनीय है कि राज्य में आदिवासी मंत्री, व जिले के पालकमंत्री विष्णु सावरा पालघर जिले के आदिवासी क्षेत्र के रहने वाले हैं।

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