सिसकती एयर इंडिया, खिलखिलाते जेट और एतिहाद

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जेट-एतिहाद के बीच डील 24 अप्रैल 2013 को घोषित हुई, ठीक उसी दिन भारत सरकार के उड्डयन विभाग ने भारत और यूएई के बीच प्रति सप्ताह 36670 अतिरिक्त यात्रियों के लिए सीटों को आबंटित करने के करार को भी मान्यता दे दी। जानकारों का मानना है कि यह सब नरेश गोयल की सत्ता के गलियारों में अपनी पैठ की वजह से ही संभव हो सका। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इसका भरपूर विरोध करते हुए इस फैसले को यह कहकर रद्द करने की मांग की थी कि सरकार ने जेट को फायदा पहुंचाने के लिए यह सुविधा दी है।
भारत और यूएई के बीच हुए इस करार के विरोध में उस समय के कई सांसदों ने भी आवाज उठाई थी तथा कङा था कि इस करार के चलते भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है क्योंकि एतिहाद के तमाम कर्मचारी पाकिस्तानी मूल के हैंष
इसके बाद तो एतिहाद ने भारत में अपने पंख फैलाने शुरू कर दिए। नरेश गोयल की सत्ता में उसके रसूख को भुनाते हुए एयर इंडिया से उसके 5 बोइंग 777-200 एलआर (लांग रेंज) विमान खरीदने के लिए लाबिंग शुरू कर दी गई। ये विमान मात्र 5 साल पुराने ही थे। इन विमानों की खरीदी पर तत्कालीन उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल के समय की गई थी जिस पर अभी भी सवालिया निशान लगे हुए हैं। सवाल यह है कि लगभग नये जैसे ये विमान एयर इंडिया बेचने को क्यों तैयार हो गया? और वह भी कौड़ियों के मोल। इसके लिए तर्क यह दिया गया कि ये विमान काफी ईंधन खाते हैं जिसकी वजह से इनको चलाना काफी महंगा हो गया है।
एयर इंडिया ने इसे सफेद हाथी की संज्ञा देते हुए इससे पीछा छुड़ाने की पहल की थी। यहां यह जानना दिलचस्प है कि 2005 में प्रफुल्ल पटेल ने एयर इंडिया के बेड़े के लिए 68 बोइंग खरीदने की बात कहकर पुराने पड़ चुके इन सफेद हाथियों को बेचने की बात को उचित ठहराया। बेचे गए बोइंग विमानों ने कुछ सालों तक भारत तथा बाद में उन्हें बिक्री के लिए तहखाने में रख दिया गया।
अक्टूबर 2013 में एतिहाद एयरलाइंस ने मुंबई में ये 5 विमान खरीदने के लिए एयर इंडिया के साथ सहमति करार पर हस्ताक्षर किए। मजेदार बात यह है कि इस बात को गोपनीय रखा गया कि विमान किस भाव पर बेचे जाएंगे। एयर इंडिया ने कहा कि एतिहाद के अलावा इन विमानों को खरीदने के लिए कोई भी सामने नहीं आया। बाजार मूल्य के आधार पर इन विमानों के लिए 12.7 करोड़ डॉलर प्रति विमान आसानी से मिल सकता था। जिसके हिसाब से 5 विमानों का मूल्य 63.5 करोड़ डॉलर कीमत के ये 5 विमान एतिहाद ने मात्र 6.80 डॉलर करोड़ डॉलर में हासिल कर लिए। एयर इंडिया के बोर्ड और भारत सरकार से मान्यता मिलने के बाद एतिहाद को मार्च 2014 में विमानों की डिलीवरी दे दी गई। एतिहाद ने इन विमानों को अपने रंग में रंगने औप अपना लोगो लगाने के बाद अबूधाबी से लॉस एंजल तक की लंबी उड़ानों के लिए लगा दिया। जो जहाज एयर इंडिया ने कबाड़ खाने में डालकर कौड़ियों के भाव से बेच दिए थे अब वे ही एतिहाद के कब्जे में जाकर दूर-दूर तक खुले आसमान में उड़ाने भरने लगे।
एयर इंडिया ने जिन विमानों को कौड़ियों के भाव बेच दिया वैसे विमान कोई भी विमानन कंरनी अपने बेड़े में रखना एक गर्व की बात मानती है। सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत सरकार ने महाराजा की बलि देकर एतिहाद और जेट की डील को आगे बढ़ा दिया। एयर इंडिया आज भी बीमार कंपनी की तरह चली रही और उसके पास सब कुछ होते हुए भी मुनाफे में नहीं आती है, क्योंकि सत्ताधारी नेताओं को एयर इंडिया के बजाए जेट और एतिहाद को फायदा पहुंचाना है। बहुत कुछ करने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराजा की सुध नहीं ली। अश्विनी लोहानी को एयरइंडिया का चीफ बनाया गया पर उनके रहते हुए एयर इंडिया को बेचना मुश्किल था। इसलिए उन्हें रेलवे का सीआरबी बना दिया गया। अब ऐसी परिस्थितियों में गोयल की जेट अगर मुनाफे में आती है और एयरइंडिया घाटे में जाती है तो सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि इसका दोषी कौन है?

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