अपमान का घूंट पीकर भी आगे बढ़ते रहे गोयल

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2013-14 में 4000 करोड़ के घाटे में थी जेट
एतिहाद ने बचाई जेट की डूबती नैया
2015-16 में जेट ने कमाया 1213 करोड़
1992 में नरेश गोयल ने जब एयर टैक्सी सर्विस स्टार्ट की थी तो उन्हे भी नहीं पता था कि वो 25 साल के अंदर सबसे बड़ी एयरलाइंस बन जाएंगे। गोयल का यह सपना तो पूरा हो चुका है, लेकिन अब उनकी महत्वाकांक्षा है कि जेट एयरवेज की गिनती पांच बड़ी एयरलाइंस में हो, इसलिए गोयल एतिहाद के साथ अपमान का घूंट हर कदम मुस्कुराकर पीते रहे। पूरी दुनिया के लिए 2011-12 ऐसा साल था, जिसमें सभी एयरलाइंस बहुत तकलीफ में गुजर रही थीं। विजय माल्या की रंगीली किंगफिशर दम तोड़ चुकी थी और नरेश गोयल की जेट एयरवेज पाई-पाई की मोहताज थी। आईसीयू में पहुंच गई जेट को बचाने के लिए नरेश गोयल उस हद तक समझौता करने के लिए तैयार थे, जो उनके सिद्धांतों में नहीं था। यही वजह है कि उन्होंने एतिहाद के साथ जाकर समझौता किया और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लेकर आए।
गोयल को इस बात की शाबाशी दी जानी चाहिए कि उन्होंने न सिर्फ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लिया बल्कि एतिहाद जैसी विदेशी एयरलाइंस को अपना भागीदार बनाया। ये वह दौर था जब जेट एयरवेज को घरेलू बाजार में लो कास्ट एयरलाइन इंडिगो एयर और स्पाइस जेट से कड़ी चुनौतियां मिल रही थीं। 2005 में अमेरिका की वर्जिन एयरलाइंस की तर्ज पर विजय माल्या ने रंगीली किंगफिशर स्टार्ट कर दी। सौंदर्य के शौकीन विजय माल्या की एयरलाइन भी सुन्दरता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी। ऐसे समय में नरेश गोयल को जेट एयरवेज संभालना एक चुनौती भरा कार्य था। नेता, मंत्री सब विजय माल्या की जेब में थे और उनकी रंगीन पार्टियों के असर से सब प्रभावित थे। माल्या अपने मन माफिक पॉलिसी सरकार से बनवाते जा रहे थे। गोयल के माथे से पसीना इसलिए छूट रहा था क्योंकि बैंकों का लोन सोलह हजार करोड़ हो गया था। तभी 2012-13 में एतिहाद, गोयल के लिए भामाशाह बनकर आ गया। क्योंकि 2010-11 के बाद जेट की बैलेंस शीट में प्रॉफिट नहीं था। 2012-13 में एतिहाद और जेट का समझौता हुआ। उस वक्त जेट एयरवेज 779 करोड़ के घाटे में थी। 2013-14 में यह नुकसान बढ़कर 4129 करोड़ हो गया। लेकिन एतिहाद का साथ मिलने के बाद 2014-15 में जेट की कठिनाईयां कम होने लगीं और 2015-16 में जेट एयरवेज 1213 करोड़ के फायदे में आ गई। इसी कारण नरेश गोयल को जेम्स होगन की सारी शर्तें मंजूर थीं।
2015-16 ऐसा दौर था, जब क्रूड आयल काफी सस्ता हो गया था। अनेक कठिनाईयों और अपमान का घूंट पीकर भी नरेश गोयल अपनी एयरलाइंस को प्रॉफिट में ले आए, लेकिन गोयल के मन में यह बात हमेशा कचोटती रही कि एतिहाद ने उनकी अमेरिका की फ्लाइट बंद करवा दी। गोयल के लिए जेट एयरवेज की फ्लाइट अमेरिका भेजना एक प्रतिष्ठा का ही विषय नहीं था बल्कि यह उनकी सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा भी थी। गोयल यह भलीभांति जानते हैं कि अमेरिका की सिक्युरिटी क्लीयरेंस लेने में उन्हें कितने पापड़ बेलने पड़े। उनके प्रतिद्वंदी उनका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद के साथ जोड़ते रहे लेकिन आज तक कोई इसका सबूत नहीं दे पाया। ऐसा कहा जाता है कि अमेरिकी एजेंसियों ने भी जांच में पाया कि नरेश गोयल और दाऊद के रिश्तों की महज अफवाह है जो संभव है कि उनके प्रतिद्वंदियों ने उन्हें नीचा दिखाने के लिए ऐसे तथ्यहीन सामग्री प्लांट कराई हो। बहरहाल गोयल इन सभी चुनौतियों को बर्दाश्त करते हुए जेट एयरवेज को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे। इसी दौरान एतिहाद के अध्यक्ष और सीईओ जेम्स होगन ने मुख्य वित्तीय अधिकारी जेम्स रिगने के साथ त्याग पत्र दे दिया। ये दो ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने जेट और एतिहाद ड़ील को अमली जामा पहनाया था। इनके जाने के बाद गोयल ने अबूधाबी में एयरफ्रांस केएलएम और डेल्टा कंबाइन के साथ दुनिया के पांच बेहतरीन एयरलाइंस में शामिल करने के लिए भूमिका निभानी शुरू कर दी।
जारी..

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