एतिहाद के शिकंजे में बुलबुल की तरह नाचे नरेश गोयल

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– एतिहाद ने जेट को बनाया फीडर एयरलाइंस
– जेट से छीन लिया खरीदी के सारे अधिकार
– जेट के भरोसेमंद अधिकारियों को दिखाया बाहर का रास्ता

भारत के महत्वाकांक्षी एयरलाइंस टायकून नरेश गोयल यह समझ रहे थे कि उन्होंने यूपीए सरकार की मेहरबानी से एतिहाद को अपने बस में कर लिया है, मगर एतिहाद ने उन पर ऐसा शिकंजा कसा कि गोयल अभी तक बिलबिला रहे हैं। डील होने के बाद एतिहाद जेट के साथ इस तरह का व्यवहार करने लगा जैसे जेट एयरवेज और नरेश गोयल उसके नौकर हों।
जेट में नरेश गोयल की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है और 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के पब्लिक शेयर आवंटित किए गये हैं। बची 24 प्रतिशत हिस्सेदारी एतिहाद को बेंची गई। लेकिन एतिहाद के सीईओ जेम्स होगन ने यह शर्त रख दी कि वह जेट एयरवेज के वाइस चेयरमैन बनेंगे। होगन का यह प्रस्ताव नरेश गोयल को जहर पीने की तरह मंजूर करना पड़ा। वाइस चेयरमैन बनने के बाद जेम्स होगन ने सबसे पहले जेट एयरवेज के सीईओ निकोस कार्डासिस को चलता कर दिया। कार्डासिस अमेरिकन थे और उन्हें एयरलाइंस बिजनेस की भरपूर समझ थी। इतना ही नहीं कार्डासिस गोयल के किचन कैबिनेट के सदस्य थे और जेट को उंचाइयों पर ले जाने में उनकी अहम भूमिका थी। जेम्स होगन जानते थे कि कार्डासिस के रहने पर वह अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे इसके लिए उन्होंने सबसे पहले उनका पत्ता गोल कर दिया। गोयल को उस समय पैसे की इतनी जरूरत थी कि वह होगन के सामने भिच्छुक की तरह गिड़गिड़ा रहे थे। जानकारों का मानना है कि इसी दौरान एतिहाद ने छः सौ मिलियन डॉलर का लोन जेट को उदार शर्तों पर बाजार से दिलवा दिया। एतिहाद जेट को पैसा तो दे रहा था लेकिन बदले में नरेश गोयल को हर जगह बकरी बनाता चला गया। उसने नरेश गोयल के चुनिंदा स्टाफ को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया।
जेट की कम्युनिकेशन हेड रागिनी चोपड़ा को एतिहाद ने साइड लाइन करवा दिया। उनकी जगह मनीष कलघटगी को मुख्य जनसंपर्क अधिकारी बनाया गया। चीफ कमर्शियल अॉफिसर सुधीर राघवन को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सुधीर राघवन उड्डयन इंडस्ट्री का जाना-माना नाम थे और इसके पहले वो सिंगापुर एयरलाइंस में कार्यरत थे। जेट के स्टाफ का सफाया करने में जुटी एतिहाद ने कमर्शियल राणनीतिकार केजी विश्वनाथ की भी छुट्टी कर दी। नौजवान विश्वनाथ इन्वेस्टर रिलेशन के महारथी थे और नरेश गोयल के बेहद नजदीक थे। एतिहाद ने जब उनकी छुट्टी की तो बेबस नरेश गोयल खून का घूंट पीकर रह गए। इसके अलावा जेट के चुनिंदा अधिकारियों में उपाध्यक्ष मनोज भंभानी, पीपी सिंह जैसे लोगों की भी छुट्टी कर दी गई। जेट एयरवेज में एतिहाद के इस आतंक से रेवेन्यू हेड राज शिवकुमार भी भाग गए। मात्र 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी लेकर एतिहाद ने नरेश गोयल की जेट एयरवेज को अपना दूध पीता बच्चा बना दिया।
जेट के चुनिंदा स्टाफ को ठिकाने लगाने के बाद एतिहाद ने जेट से कहा कि वह लो कास्ट एयरलाइंस बन्द कर के फुल सर्विस एयरलाइंस बनने की कोशिश करे। लो कास्ट एयरलाइंस में यात्रियों को खाना-पीना तथा अन्य सुविधाए नहीं उपलब्ध होती हैं। जबकि फुल सर्विस एयरलाइंस में यह सब मुफ्त में मिलता है। भारत में एयर इंडिया और जेट एयरवेज फुल सर्विस एयरलाइंस हैं। अब विस्तारा भी इसमें जुड़ गई है। लेकिन जेट ने सहारा एयरलाइंस खरीदने के बाद जेटलाइट और जेटकनेक्ट के नाम से लो कॉस्ट एयरलाइंस चालू कर दी थी। एतिहाद को जेट की यह लो कॉस्ट एयरलाइंस मंजूर नहीं थी। लिहाजा नरेश गोयल को लो कॉस्ट एयरलाइंस का धंधा समेटना पड़ा। एतिहाद जेट पर लगातार शिकंजा कसता गया और उसे मजबूर किया कि एयरलाइंस के लिए खरीदा जाने वाला सामान अब जेट नहीं बल्कि एतिहाद खरीदेगा। मतलब नरेश गोयल से खरीददारी के सारे अधिकार एतिहाद ने छीन लिए। एतिहाद ने तर्क दिया कि वह बल्क में सामान खरीदता है और उसे सस्ता पड़ता है। इस वजह से वह विमान में प्रयोग किए जाने वाले सभी सामान खुद खरीदेगा। हद तो तब हो गई जब जेट के पायलटों को कहा जाने लगा कि वो एतिहाद के भी विमान उड़ाएं। इतना ही नहीं एतिहाद ने जेट को अपना फीडर एयरलाइंस बना दिया और जेट के डोमेस्टिक विमानों को कम करने का फरमान जारी करते हुए कहा कि उसके ज्यादातर विमान आबूधाबी की सेवाएं शुरू करें और यह सेवाएं भारत के छोटे शहरों से शुरू होनी चाहिए। इससे अमेरिका, लंदन, पेरिस जाने वाले पैसेंजर आबूधाबी पहुंचें और वहां से एतिहाद उनको दुनिया के कोने-कोने मे पहुंचाए। तात्पर्य यह है कि जैसे कोई बड़ी बस किसी स्थान पर आती है, वहां से तांगा गाड़ी को पैसेंजर मिलते हैं, ऐसा ही बड़ी बस एतिहाद बन गया था और जेट को तांगा गाड़ी बना दिया था।
इससे भी ज्यादा अपमानित नरेश गोयल उस दिन हुए जिस दिन 2014 में जेडब्ल्यू मेरियट में प्रेस कांफ्रेस बुलाई गई। प्रेस कांफ्रेस में भी नरेश गोयल को जेम्स होगन भीगी बिल्ली बनाकर रखता था। उस दिन अंग्रेजी दैनिकों के आठ-दस पत्रकार प्रेस कांफ्रेंस शुरु होने से पहले ही हाल के अंदर प्रवेश कर गए। उस समय एतिहाद का कम्युनिकेशन हेड जेम्स होगन को यह पहाड़ा रटा रहा था कि उन्हें नरेश गोयल के साथ क्या बोलना है। अचानक वहां समय से पहले पहुंचे पत्रकारों को देखकर एतिहाद का कम्युनिकेशन हेड अपना आपा खो बैठा औऱ वरिष्ठ मीडिया कर्मियों को बहुत बेइज्जत करते हुए बाहर निकाला। उसी दिन से यह चर्चा शुरू हो गई कि एतिहाद ने गोयल की जेट को पूरी तरह से अपनी जकड़ में ले लिया है। इस बीच एतिहाद ने जेट की अमेरिका जाने वाली फ्लाइटें बन्द करवा दी और उसे मजबूर किया कि वह अमेरिका जाने वाले यात्री एतिहाद को दे। नरेश गोयल की जेट एयरवेज को बड़ी मुश्किल से अमेरिका से सिक्योरिटी क्लीयरेंस मिला था। क्योंकि गोयल के ऊपर यह आरोप लगते रहे कि वह माफिया डॉन दाउद के बहुत करीब हैं।
जारी….

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