Friday, April 26, 2019
होम ब्लॉग

वोटिंग के दिन बीएमसी नहीं करेंगी पानी सप्लाई

0

बीएमसी कर्मियों की लगी है चुनावी ड्यूटी
मुंबई में पानी सप्लाई की मांग रोजाना 4200 लाख लीटर है

दोपहर संवाददाता
मुंबई। मुंबई वासियों को आने वाली 29 अप्रैल को पानी की भारी किल्लत से जूझना पड़ सकता है. बीएमसी ने इस दिन पानी सप्लाई नहीं करने की घोषणा की है. दरअसल, 29 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान है. इसमें बीएमसी कर्मचारियों की इलेक्शन ड्यूटी लगाई गई है. जिसमें सभी कर्मचारी व्यस्त रहेंगे. जिसके चलते पानी की सप्लाई रोक दी गई है.बीएमसी के मुताबिक, मुंबई के कुछ इलाकों में 28 और 29 अप्रैल यानि वोटिंग के एक दिन पहले और वोटिंग के दिन पानी की सप्लाई बंद रखी जायेगी. बता दें कि मुंबई में पानी सप्लाई की मांग रोजाना 4200 लाख लीटर है. ऐसे में चुनाव के दिन मुंबईवासियों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा.
इन इलाकों में नहीं होगा पानी सप्लाई
सायन, राओली हिल, माटुंगा, सीजीएस कॉलोनी सेक्टर-7, अंटोप हिल, संगम नगर, वडाला, बीपीटी हॉस्पिटल कॉलोनी, हिंदू कॉलोनी, पारसी कॉलोनी में पानी सप्लाई नहीं होगा.

कन्हैया कुमार ने नहीं लगाया था जेएनयू में नारा:शबाना आजमी

0

दोपहर संवाददाता
मुंबई। मशहूर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी 25 अप्रैल को मुम्बई से पटना पहुंचीं. इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वह बेगूसराय से सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार का समर्थन करने के लिए बिहार आई हैं. बेगूसराय रवाना होने से पहले पटना एयरपोर्ट पर उन्होंने ने कहा कि कन्हैया का विजन उन्‍हें अच्छा लगता है और यही कारण है कि वह मुंबई से बेगूसराय कन्हैया कुमार का प्रचार करने आई हैं.शबाना आज़मी ने कहा, ‘मैं कन्हैया को निजी तौर पर जानती हूं. मैं कन्हैया की विचारधारा से प्रभावित हूं. उसकी देश, किसानों और गरीबों को लेकर जो सोच है निश्चित तौर पर मैं उसकी कायल हूं. मेरी सोच है कि बेगूसराय से कन्हैया कुमार को जीतना चाहिए. ये हमारा फर्ज है.’
राष्ट्रभक्ति को लेकर कन्हैया कुमार के खिलाफ बीजेपी की ओर से की जा रही बयानबाजी पर शबाना आज़मी का कहना था कि ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा कन्हैया कुमार ने नहीं लगाया था, बल्कि वीडियो एडिट कर इस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाया गया था.

रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का दबाव बना रही सरकारः जाकिर नाईक

0

दोपहर संवाददाता
मुंबई। विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक ने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि वह उसे फंसाने में लगी है। जाकिर का आरोप है कि इंटरपोल पर उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए भारत सरकार लगातार दबाव बना रही है। नाईक ने एक बयान में कहा कि वह इस बात से अवगत हैं,‘सरकार मेरे खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने के लिए इंटरपोल पर दबाव बना रही है।’ बता दें कि जाकिर नाईक 2016 में भारत छोड़ कर भाग गए थे। उन्होंने दावा किया, ‘यह मुझे फंसाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है लेकिन कुछ सदस्य देशों से पुष्टि करने के बाद, मैं यह दावा कर सकता हूं कि आज की तारीख मैं मेरे खिलाफ कोई रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय समाचार पत्रों में से एक ने भारतीय सरकार के आंतरिक विचार-विमर्श के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की।
उन्होंने कहा कि यह विचार-विमर्श तो पिछले दो साल से अधिक समय से चल रहा है और समाचार पत्र ने इस मामले में जल्दबाजी दिखाई। नाईक ने कहा कि इंटरपोल ने पहले ही उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस को रद्द कर दिया था। उसने कहा, ‘सरकार को आरोपपत्र दायर किए और इंटरपोल पर दबाव बनाते हुए करीब डेढ़ साल हो गया है। लेकिन अभी जैसे हालात हैं, मेरे पास यह मानने के लिए एक भी कारण नहीं है कि इंटरपोल किसी भी अनुचित दबाव में आएगा।’
नाईक के अभी मलेशिया में होने की खबर है। उनके खिलाफ 2016 में तब से जांच जारी है, जब से केंद्र ने उनके ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ को प्रतिबंधित कर दिया था।
एनआईए की एक विशेष अदालत ने 2017 जून में नाईक को घोषित अपराधी करार दिया था। उन पर युवकों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने, घृणा फैलाने वाले भाषण देने और समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने के आरोप हैं। एनआईए ने मुम्बई की एक अदालत में अक्टूबर 2017 में नाईक और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।

‘साजिश’ की जांच करेंगे पटनायक

0

सीजेआई रंजन गगोई पर यौन उत्पीड़न का मामला
बंद लिफाफे में अदालत को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट

दोपहर संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के खिलाफ ‘साजिश’ के मामले में जांच के आदेश दिए हैं. अदालत ने स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम का गठन किया है, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके पटनायक करेंगे.
इसके साथ ही इस मामले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) चीफ उनकी मदद करेंगे.सुप्रीम कोर्ट ने वकील बैंस के हलफ़नामे और दी गई सामग्री सील बंद लिफ़ाफ़े में जांच के लिए पूर्व जस्टिस पटनायक को भेजने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने जांच का यह आदेश वकील उत्सव बैंस की ओर से किए गए दावों के बाद दिया है.
उत्सव ने हलफनामा दायर कर कहा है कि कॉरपोरेट जगत के व्यक्ति और कुछ फिक्सर चीफ जस्टिस को झूठे आरोपो में फंसाने की साज़िश रच रहे हैं.
हलफनामे में बैंस ने दावा किया कि गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का इल्ज़ाम लगाने वाली पूर्व महिला कर्मचारी का प्रतिनिधित्व करने और सीजेआई के खिलाफ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेस के लिए डेढ़ करोड़ रुपये देने की पेशकश की गयी थी. इसके बाद मंगलवार को अदालत ने बैंस को नोटिस जारी कर अपने दावे के समर्थन में सीलबंद लिफाफे में सामग्री पेश करने का निर्देश दिया था.

कौन हैं एके पटनायक?

69 वर्षीय अनंग कुमार पटनायक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं। पटनायक 2009 से लेकर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। सीबीआई डायरेक्टर रहे आलोक वर्मा मामले में एके पटनायक को हाल ही में जांच प्रमुख नियुक्त किया गया था। पटनायक को 2012 में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में आने वाले मामलों की सुनवाई करने के लिए बनाई गई दो जजों की बेंच में शामिल किया गया था। पटनायक उस ‘इन-हाउस कमेटी’ के सदस्य थे, जिसने कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन पर लगे फंड के गलत उपयोग के आरोपों की जांच की थी। इस जांच के बाद भारत में ऐसा पहली बार किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाया गया था। जस्टिस एके ने कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाए थे। 2016 में उन्होंने कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम के कारण जजों की गुणवत्ता खतरे में आ जाती है।17 नवंबर, 2009 से 2 जून, 2014 तक सुप्रीम कोर्ट के जज बने रहने के बाद एके पटनायक के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की ओर से सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन पद के लिए नॉमिनेट किया गया था।

जस्टिस रमन्ना ने नाम वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति से जस्टिस एनवी रमन्ना ने किनारा कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस इस मामले में विभागीय जांच के आदेश देते हुए तीन सिटिंग जज- जस्टिस एसए बोबड़े, एनवी रमन्ना और इंदिरा बनर्जी की समिति का गठन किया था.

क्या है वजह?
शिकायत करने वाली महिला ने इस समिति में रमन्ना के होने पर सवाल खड़े किए थे. महिला का आरोप है कि रमन्ना और सीजेआई गोगोई ख़ास दोस्त हैं ऐसे में वो जांच को प्रभावित कर सकते हैं. महिला के मुताबिक दोनों जजों के पारिवारिक संबंध हैं ऐसे में निष्पक्ष जांच सवालों के घेरे में आ जाती है. महिला का आरोप है कि 20 अप्रैल को अज उन्होंने एफिडेविट दाखिल किया था तब भी जस्टिस रमन्ना ने आरोपों को खारिज कर दिया था.

एनडीए 2014 से ज्यादा बड़ी जीत दर्ज करेगी : सीएम फडणवीस

0

राजनीति की दुकान बंद हो गई है राज ठाकरे की
पीएम मोदी को सपोर्ट कर रहा गरीब तबका
दोपहर संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि एनडीए 2014 से ज्यादा बड़ी जीत दर्ज करेगी. उन्होंने कहा कि इस बार मध्यम वर्ग से ज्यादा गरीब तबका पीएम मोदी को सपोर्ट कर रहा है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाहुबली हैं, उनकी अगुवाई में एनडीए प्रचंड जीत दर्ज करेगी. इस बार महाराष्ट्र में भी एनडीए पिछली बार से ज्याद सीटें जीतेगी. महाराष्ट्र में पीएम मोदी को अपार जन समर्थन मिल रहा है. इस तपती धूप में भी भारी भीड़ जुट रही है. शिवसेना के साथ गठबंधन पर सीएम फडणवीस ने कहा कि तीस साल हम साथ रहे और तीन साल हमारी और शिवसेना में अनबन रही. उद्धव ठाकरे खुद कुछ बोलते हैं तो हम रिएक्शन देते रहे, लेकिन अब सबकुछ ठीक है. हमने दूरियों को पाटा और आज हम साथ हैं, हम दोनों भाई हैं साथ मिलकर काम कर रहे हैं.
एनडीए के खिलाफ राज ठाकरे के प्रचार पर सीएम फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्वाण सेना सारे चुनाव हार रही है. राज ठाकरे के मन में एक दर्द है की पीएम मोदी के कारण उनकी राजनीति की दुकान बंद हो गई है.

साध्वी प्रज्ञा ने करकरे पर बयान देकर गलत किया’
मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे के ऊपर बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा के बयान पर फडणवीस ने कहा जो भी बयान दिया गया है वह सरासर गलत है. साध्वी को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए. साध्वी को अपनी गलती का अहसास हो चुका है. उन्होंने माफी भी मांग ली है. फडणवीस ने कहा कि अगर पार्टी कहेगी तो साध्वी प्रज्ञा के लिए प्रचार करूंगा, जो पार्टी का उम्मीदवार है वह हम सब का उम्मीदवार है.

पीएम मोदी के लिए कोई खतरा नहीं हैं शरद पवार
महाराष्ट्र के सीएम ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के लिए शरद पवार कोई खतरा नहीं पैदा कर सकते हैं. महागठबंधन बना कहां है. सब अलग लड़ रहे हैं. शरद पवार से हमारी कोई निजी शत्रुता नहीं है, वो हमारे एक राजनैतिक विरोधी हैं. मोदी जी को प्रचंड बहुमत मिलने वाला है.उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले दिन से लगातार झूठ बोल रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करते हैं, ये कितनी शर्म की बात है. अयोध्या हमारे भगवान राम की नगरी है. प्रधानमंत्री को बिलकुल वहां जाना चाहिए.

गरीबी भाषण से नहीं, काम से हटती है : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

0

पीएम मोदी कर रहे है गरीबी हटाने का काम
गरीबों के लिए कांग्रेस ने कुछ नहीं किया

दोपहर संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गरीबी भाषण से नहीं, काम करने से हटती है। प्रधानमंत्री मोदी गरीबी हटाने के लिए काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जनता से मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए मतदान करने की अपील की है, जिससे देश की गरीबी को समूल मिटाया जा सके। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नंदूरबार में जनसभा में कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आजादी के बाद से ही गरीबी हटाने के नाम पर वोट मांगती रही,लेकिन सत्ता में आने के बाद गरीबों के लिए कुछ नहीं किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने देश से गरीबी हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करना शुरू किया है। पिछले 5 वर्षों में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को घर देने का काम मोदी सरकार ने किया है। इसी तरह देश में हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपये तक के ईलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन दिये जा रहे हैं । मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार व राज्य सरकार की ओर से किसानों को हर तरह की मदद की जा रही है।अकाल हो या अतिवृष्टि, फसल बीमा के माध्यम से किसानों की मदद की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसानों को पेंशन दिए जाने की तैयारी भी सरकार की ओर से की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अफवाह फैला रही है कि आरक्षण हटा दिया जाएगा जबकि इसमें सच्चाई नहीं है।

भाजपा ने दिया कांग्रेस को झटका

0

पूर्व नगरसेवक ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा

जितेंद्र तिवारी/ दोपहर
भिवंडी। भिवंडी लोकसभा क्षेत्र में ये चुनाव भाजपा ने कांग्रेस को जोरदार झटका दिया है।25 वर्षो तक कांग्रेस के नगरसेवक रहे मधुकर जगताप ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।जिसके बाद वे देश मे पुनः मोदी सरकार बने इसके लिए वे भाजपा से जुड़कर महायुति उमीदवार का काम करने में जुट गए है।जिसके बाद नारपोली इलाके में महायुति उमीदवार को जोरदार मत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
मालूम हो कि आगामी 29 अप्रैल को लोकसभा का चुनाव है।ऐसे में जहां चुनाव लड़ रहे उमीदवार लोगों से मिल एक एक वोट जोड़ने में जुटे है वही कांग्रेस से लोगो की नाराजगी बढ़ते जा रही है।स्थानीय देवजी नगर इलाके से 25 साल तक नगरसेवक रही मधुकर जगताप ने ये लोकसभा चुनाव कांग्रेस को राम राम कर लिया है।उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा शहर अध्यक्ष को सौप दिया है।जगताप का कहना है कि कांग्रेस में इन दिनों लगातार गुटबाजी बढ़ रही है।पार्टी में इन दिनों किसी की कोई इज्जत नही हो रही है।पार्टी को एक जाति विशेष ने हाईजैक कर रखा है।इतना ही नही उन्होंने कहा कांग्रेस के उमीदवार सुरेश टावरे खुद नगरसेवकों व पार्टी में कार्यरत हिंदू पदाधिकारियों की उपेक्षा कर रहे है।वे हिंदू बस्तियों में प्रचार करना तो दूर आना भी गवारा नही समझ रहे है।जगताप ने आरोप लगाते हुए कहा कि मनपा में कांग्रेस की सत्ता होने के कारण शहर का विकास रुक गया है।उन्होंने कहा कि इस समय देश को मोदी जैसे नेतृत्व की जरूरत है।मोदी ही देश का कुशलता पूर्वक नेतृत्व कर कर सकते है।जगताप मोदी के नेतृत्व से प्रभावित कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के खेमे में आकर महायुति उमीदवार कपिल पाटिल के प्रचार में जुट गए है ताकि पुनः देश मे मोदी सरकार बन सके।हालांकि जगताप का कांग्रेस का साथ छोड़ने से कांग्रेस को बड़ा झटका माना जा रहा है।अब भाजपा को जहां एक अच्छा भिवंडी में दलित नेता मिल गया है वही उनके इलाके से अब भाजपा को जोरदार मत मिलने की संभावना से भी इनकार नही किया जा सकता है।

मुंबई में राकांपा नेता पर जानलेवा हमला

0

दोपहर संवाददता
मुंबई। शहर में गोवंडी इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार संजय पाटिल के समर्थक और नगरसेविका नदिया शेख के पति मोहसिन शेख पर जानलेवा हमला हुआ है। इसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना बुधवार देर रात उस वक्त की है जब कुछ कार्यकर्ताओं के साथ कार्यालय के बाहर खड़े होकर बातचीत कर रहे थे।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दो बाइक पर सवार होकर चार नकाबपोश हमलावर आए। हमलावरों ने अचानक तलवार और कुल्हाड़ी से मोहसिन पर हमला कर दिया। मोहसिन की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। मुंबई नॉर्थ सीट से एनसीपी उम्मीदवार संजय दीना पाटिल ने इस हमले को राजनीतिक साजिश बताया है। बता दें पिछले कुछ दिनों से शहर में इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही है.

बिल्डर को 3 साल की जेल

0

ग्राहक को नहीं दिया समय पर फ्लैट
मुंबई के अरुण केजरीवाल ने 2005 में कराया था फ्लैट बुक

दोपहर संवाददाता
मुंबई। कंज्यूमर कमीशन के आदेश के बाद भी जब बिल्डर ने घर खरीदार को फ्लैट का पजेशन नहीं दिया तो कमीशन ने बिल्डर को सीधा मुंबई की ऑर्थर रोड जेल भेज दिया और वो भी 3 साल की सजा के साथ. हालांकि फ्लैट बुकिंग के 14 साल बाद भी खरीददार आज भी पजेशन के इंतजार में है.मुंबई के कांदिवली इलाके में रहने वाले अरुण केजरीवाल और उनके परिवार ने साल 2005 में गुडी पाडवा के मौके पर कांदीवली में एसडी कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट में 1,165 स्कवायर फीट का फ्लैट बुक कराया था. साल 2007 तक फ्लैट का पजेशन नहीं मिला तब स्टेट कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया, 9 साल तक केस चलता रहा और साल 2016 में कंज्यूमर कमीशन ने बिल्डर को बकाया रकम लेकर एग्रीमेंट करवाने का आदेश दिया.आदेश के ढाई साल बाद भी फ्लैट का कब्जा देने के आदेश का पालन नहीं होने पर कंज्यूमर कमीशन ने बिल्डर को 3 साल कैद की सजा सुनाई है और बिल्डर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.कमीशन ने अपने फैसले में इस बात का जोर दिया है कि बैलेंस राशि का भुगतान करने के बाद भी बिल्डर ने जानबूझकर आदेश का पालन नहीं किया, इसलिए बिल्डर को हिरासत में भेजा गया है, आदेश के मुताबिक अगर बिल्डर आदेश का पालन करते हुए खरीदार को फ्लैट दे देता है तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाएगा.
पूरे मामले की जांच में ये भी पता चला है कि बिल्डर ने घर खरीददार को धोखा दिया और फ्लैट को किसी और पहले ही बेच दिया है, इस तरह के मामले में कमीशन के आदेश के बिल्डर जेल चला गया लेकिन घर खरीदार 14 साल बाद भी फ्लैट के पजेशन का इंतजार कर रहा है.

राहुल गांधी जिम्मेदार होने का अहसास कराये

0

सच-झूठ की परवाह न करने के क्या नतीजे होते हैैं, इसका ज्वलंत उदाहरण है राहुल गांधी का ‘चैकीदार चोर है’ बयान, जिसके लिये उन्हें खेद जताना पड़ा है। उन्हें सार्वजनिक तौर पर इसलिए खेद व्यक्त करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए यह कह दिया था कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी मान लिया कि चैकीदार चोर है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा कोई निर्णय नहीं दिया, सिर्फ उसने राफेल-सौदे पर बहस को मंजूरी दी थी।

सत्रहवीं लोकसभा के इस महासंग्राम में बहुत सारा अजूबा एवं अलोकतांत्रिक घटित हो रहा है, हर क्षण जहर उगला जा रहा है। जो राजनीतिक मूल्यों को नहीं बल्कि जीवन मूल्यों को ही समाप्त कर रहा हैं। नैतिकता, सच्चाई, लोकतांत्रिक मूल्यों से बेपरवाह होकर जिस तरह की राजनीति हो रही है, उससे कैसे आदर्श भारत का निर्माण होगा? कैसे राष्ट्रीय मूल्यों को बल मिलेगा? कैसे लोकतंत्र मजबूत बनेगा? ये ऐसे सवाल हैं, जिन पर सार्थक बहस जरूरी है। आखिर कब तक झूठे, भ्रामक एवं बेबुनियाद बयानों को आधार बनाकर चुनाव जीतने के प्रयत्न होते रहेंगे? राहुल गांधी का ‘चैकीदार चोर है’ बयान इस चुनाव की गरिमा एवं गौरव पर एक बदनुमा दाग की तरह है, क्योंकि ऐसा बयान और उससे जुड़े तथ्य न केवल आधारहीन है, बल्कि शर्मनाक है। राहुल गांधी अब तो जिम्मेदार बने, अपनी नासमझी एवं अपरिपक्वता को उतार फंेके।
सच-झूठ की परवाह न करने के क्या नतीजे होते हैैं, इसका ज्वलंत उदाहरण है राहुल गांधी का ‘चैकीदार चोर है’ बयान, जिसके लिये उन्हें खेद जताना पड़ा है। उन्हें सार्वजनिक तौर पर इसलिए खेद व्यक्त करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए यह कह दिया था कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी मान लिया कि चैकीदार चोर है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा कोई निर्णय नहीं दिया, सिर्फ उसने राफेल-सौदे पर बहस को मंजूरी दी थी। चूंकि उन्हें अदालत की अवमानना का सामना करना पड़ता इसलिए उन्होंने बिना किसी देरी के खेद व्यक्त करके खुद को बचाया, लेकिन इससे उनकी विश्वसनीयता को जो चोट पहुंची, उसकी भरपाई आसानी से नहीं होने वाली है, इसके दूरगामी परिणाम होंगे। इस गैर जिम्मेदाराना हरकत से होने वाले नुकसान को देखते हुए राहुल ने अपने पक्ष में यह सफाई दी की वे चुनावी जल्दबाजी और जोश में वैसा बोल गए। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय अभी तक तो भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की याचिका पर विचार कर रहा था लेकिन उसने अब राहुल को अदालत की अवमानना का औपचारिक नोटिस भी जारी कर दिया है।
राफेल-सौदे पर सर्वोच्च न्यायालय राहुल के वकील अभिषेक सिंघवी के तर्कों से प्रभावित नहीं हुई और उसने 30 अप्रैल को दुबारा सुनवाई की तारीख तय कर दी है। लेकिन यहां प्रश्न यह है कि आखिर देश के शीर्ष राजनीतिक दलों के सर्वेसर्वा ही अदालत की अवमानना करेंगे तो आमजनता को क्या प्रेरणा देेंगे? राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता एवं हठधर्मिता न केवल अदालत की अवमानना करती रही है बल्कि देश की जनता की भावनाओं से भी उन्होंने खिलवाड़ किया है। अपने तथाकथित इस बयान पर अदालत को दिये गये लिखित खेद प्रकट की कार्रवाही के घंटे भर बाद में ही ‘चैकीदार चोर है’, का नारा अमेठी की सभा में लगवा दिया। फिर यही नारा रायबरेली में भी लगवाया। उनकी कथनी और करनी में कितना अन्तर है, कितना दोगलापन है, इससे जाहिर होता है।
इन चुनावों में इस तरह के राजनैतिक स्वार्थों ने हमारे लोकतांत्रिक इतिहास एवं संस्कृति को एक विपरीत दिशा में मोड़ दिया है और आम जनता ही नहीं, बल्कि प्रबुद्ध वर्ग भी दिशाहीन मोड़ देख रहा है। अपनी मूल लोकतांत्रिक संस्कृति को रौंदकर किसी भी अपसंस्कृति को बड़ा नहीं किया जा सकता। जीवन को समाप्त करना हिंसा है, तो जीवन मूल्यों को समाप्त करना भी हिंसा है। महापुरुषों ने तो किसी के दिल को दुखाना भी हिंसा माना है। राहुल गांधी ने विचार एवं व्यवहार की हिंसा का तांडव ही कर दिया है, असंख्य जनभावनाओ को उन्होंने लील दिया है। यों तो चुनाव में गिरावट हर स्तर पर है। समस्याएं भी अनेक मुखरित हुई हैं पर लोकतांत्रिक मूल्यों को धुंधलाने एवं विघटित करने वाली यह घटना एक काले अध्याय के रूप में अंकित रहेगी। इस तरह अनैतिकता की ढलान पर फिसलती राजनीति के लिए हर इंसान के दिल में पीड़ा है। सचाई यही है कि अदालत या चुनाव आयोग ‘चैकीदार चोर है’ के नारे के आधार पर राहुल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं लेकिन राहुल और सोनियाजी क्या भारत के लोगों के मिजाज को एवं जनभावनाओं को जरा भी नहीं समझते हैं? जिस मर्यादा, सद्चरित्र और सत्य आचरण पर हमारी राजनीतिक संस्कृति जीती रही है, राजनीतिक व्यवस्था बनी रही है, लोकतांत्रिक व्यवहार चलता रहा है वे लुप्त हो गये। उस वस्त्र को जो राष्ट्रीय जीवन को ढके हुए था, हमने उसको उतार कर खूंटी पर टांग दिया है। मानो वह हमारे पुरखों की चीज थी, जो अब काम की नहीं रही। तभी इस तरह का नारा लगवाते समय राहुल ने न मोदी की उम्र का ख्याल किया, न उनके पद का। यह बचकाना एवं गैरजिम्मेदाराना हरकत, पता नहीं किसके इशारे पर की जा रही है? राजनीति में विरोध प्रदर्शन होना ही चाहिए, अपने पक्ष को मजबूती से रखा भी जाना चाहिए, जहां कहीं राष्ट्र-विरोधी कुछ हुआ है तो उसे उजागर भी किया जाना चाहिए, राफेल-सौदे हो या नोटबंदी, गरीबी हो या बेरोजगारी, महिला अपराध हो या महंगाई का मामला-सत्तारुढ़ दल पर जमकर प्रहार किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसे तीर मत चलाइए, जो आपके सीने को ही चीर डाले, लहुलूहान कर दें। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के पास मोदी सरकार को कठघरे में खड़े करने के लिए कोई ठोस मुद्दे नहीं थे। सच तो यह है कि ऐसे एक नहीं अनेक मुद्दे थे और वे इसलिए थे, क्योंकि कोई भी सरकार इतने बड़े देश में पांच साल में जनता की सभी अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सकती। इसके अलावा यह भी किसी से छिपा नहीं कि मोदी सरकार अपने किये कई वायदे पूरे नहीं कर सकी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने झूठ का सहारा लेना बेहतर समझा। पता नहीं कहां से वह यह खोज लाए कि राफेल सौदे में चोरी हुई है। यदि उनके पास इस सौदे में गड़बड़ी के कोई ठोस सुबूत थे तो वे सामने रखे जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा करने के बजाय वह लगातार यह झूठ दोहराते रहे कि अनिल अंबानी की जेब में इतनी रकम डाल दी गई। इस सौदे में चोरी हुई है, भ्रष्टाचार हुआ है। यह विडम्बना एवं हास्यास्पद ही है कि बिना आधार के किसी का चरित्रहनन किया जाये?
राहुल गांधी राफेल विमान की कीमत के साथ ही अनिल अंबानी की जेब में डाली जानी वाली तथाकथित रकम में अपने मन मुताबिक हेरफेर करते रहे, अपने बयान भी बदलते रहे हैं। वे भारत की जनता को बेवकूफ समझने की भूल करते रहे, आखिर उन्होंने यह कैसे समझ लिया कि आम जनता बिना सुबूत इस आरोप को सच मान लेगी कि राफेल सौदे में गड़बड़ी की गई है? शायद उन्हें अपने झूठ पर ज्यादा यकीन था इसलिए वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ फ्रांस सरकार के स्पष्टीकरण और कैग की रपट को भी नकारते रहे। लेकिन वे भूल गये कि भारत की जनता अब शिक्षित भी है और जागरूक भी है। दूध का दूध और पानी का पानी करना उसे भलीभांति आता है और इस बात का सुबूत चुनाव परिणामों में स्पष्ट देखने को मिलेगा। हमारे लोकतांत्रिक अनुष्ठान का यह महापर्व कई प्रकार के जहरीले दबावों से प्रभावित है। लोकतांत्रिक चरित्र न तो आयात होता है और न निर्यात और न ही इसकी परिभाषा किसी शास्त्र में लिखी हुई है। इसे देश, काल, स्थिति व राष्ट्रीय हित को देखकर बनाया जाता है, जिसमें हमारी संस्कृति एवं सभ्यता शुद्ध सांस ले सके और उसके लिये चुनाव का समय एक परीक्षा एवं प्रयोग का समय होता है। इस परीक्षा एवं प्रयोग को दूषित करने का अर्थ राष्ट्रीय चरित्र को दूषित करना है। आवश्यकता है लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवंत बनाने की। आवश्यकता है राजनेताओं को प्रामाणिक बनाने की। आवश्यकता है आदर्श राष्ट्र संरचना की। आवश्यकता है राष्ट्रीय हित को सर्वाेपरि रखकर चलने की, तभी देश के चरित्र में नैतिकता आ सकेगी। 

लेटेस्ट न्यूज़